Sonam Wangchuk Protest Update: लद्दाख की मांग और NEET विवाद! 15वें दिन भूख हड़ताल पर सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ी

Sonam Wangchuk Protest Update: लद्दाख की मांग और NEET विवाद! 15वें दिन भूख हड़ताल पर सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ी

By MoneyCal Team • 13 जुलाई 2026

लद्दाख (Ladakh) के अधिकारों और पर्यावरण को बचाने की लड़ाई लड़ रहे मशहूर शिक्षाविद् और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। जुलाई 2026 में, वांगचुक अपनी मांगों को लेकर नई दिल्ली के जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल (Indefinite Hunger Strike) पर बैठे हैं। आज उनकी हड़ताल का 15वां दिन है और लगातार खराब होती सेहत के बावजूद उनका हौसला कम नहीं हुआ है। इस बार उनका यह आंदोलन सिर्फ लद्दाख तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़ गया है। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों वांगचुक ने फिर से अनशन का रास्ता चुना है और उनकी नई मांगें क्या हैं।

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वांगचुक की नई मांग: NEET विवाद और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा

सोनम वांगचुक हमेशा से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने और राज्य का दर्जा (Statehood) दिलाने की मांग करते रहे हैं। लेकिन इस बार का आंदोलन थोड़ा अलग है। वांगचुक ने हाल ही में सामने आए NEET और अन्य परीक्षाओं के पेपर लीक विवाद (Paper Leak Controversy) के खिलाफ आवाज़ उठाई है।

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उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नामक एक छात्र संगठन को अपना पूरा समर्थन दिया है, जो इन परीक्षाओं में हुई धांधली की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। वांगचुक की मुख्य मांग यह है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दें। 12 जुलाई की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, वांगचुक का ब्लड प्रेशर काफी कम हो गया है और उनका वजन लगभग 7.8 किलो तक गिर चुका है।

🚨 20 जुलाई को संसद मार्च: वांगचुक ने देश के युवाओं और नागरिकों से अपील की है कि वे सिर्फ सोशल मीडिया (Social Media) पर समर्थन न दें, बल्कि 20 जुलाई 2026 को संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) के शुरू होने पर एक शांतिपूर्ण मार्च में हिस्सा लें।

लद्दाख की मांगों का क्या हुआ? (Article 371 Status)

एक तरफ वांगचुक राष्ट्रीय मुद्दों पर आवाज़ उठा रहे हैं, वहीं लद्दाख के स्थानीय मुद्दे अभी भी पूरी तरह सुलझे नहीं हैं। हालाँकि, हाल ही में गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी की गई मई की मीटिंग्स की रिपोर्ट से पता चला है कि केंद्र सरकार लद्दाख के लिए एक नया प्रशासनिक मॉडल (Governance Model) तैयार करने पर विचार कर रही है। ऐसा माना जा रहा है कि सरकार लद्दाख को आर्टिकल 371 (Article 371) के तहत कुछ विशेष अधिकार देने पर राजी हो सकती है। लेकिन लद्दाख के स्थानीय नेताओं (Leh Apex Body) का कहना है कि बातचीत की रफ्तार बहुत धीमी है।

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स्टूडेंट्स का भविष्य और आपकी फाइनेंसियल प्लानिंग

NEET जैसे बड़े एग्जाम्स में हुई गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों के सपनों को तोड़ा है। आज के समय में हायर एजुकेशन (Higher Education) बहुत महंगी हो गई है। कोचिंग से लेकर कॉलेज की फीस तक, एक आम परिवार की सारी जमापूंजी खर्च हो जाती है। अगर आप एक माता-पिता हैं, तो आपको अपने बच्चों की एजुकेशन के लिए पहले से ही निवेश (Investment) शुरू कर देना चाहिए।

म्यूच्यूअल फंड्स (Mutual Funds) में किया गया लगातार निवेश आपके बच्चे के भविष्य को सुरक्षित कर सकता है। आप अपने इन्वेस्टमेंट का गोल सेट करने के लिए हमारे SIP Calculator का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा, अपने पैसों को सही जगह फिक्स करने के लिए आप FD Calculator से रिटर्न्स की तुलना भी कर सकते हैं।

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निष्कर्ष (Conclusion)

सोनम वांगचुक का यह शांतिपूर्ण आंदोलन लोकतंत्र (Democracy) की एक मजबूत तस्वीर पेश कर रहा है। उनकी मांगें चाहे लद्दाख के पर्यावरण को लेकर हों या देश के युवाओं के भविष्य को लेकर, उनका संदेश बिल्कुल साफ है—सरकार को जवाबदेह (Accountable) होना ही पड़ेगा। अब देखना यह है कि 20 जुलाई के संसद मार्च का क्या असर होता है।

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