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स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव: अब कक्षा 6 से अनिवार्य होगा \

By MoneyCal Editorial TeamPublished 2026

Table of Contents

What's New

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत, शिक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 से 12 तक के सभी विद्यार्थियों के लिए

Why It Matters

भारत में वित्तीय साक्षरता की दर विकसित देशों की तुलना में काफी कम रही है। भविष्य की पीढ़ी को कम उम्र में ही पैसे के प्रबंधन की शिक्षा देने से वे बड़े होकर कर्ज के जाल (Debt Trap) से बच सकेंगे और समय रहते निवेश शुरू कर पाएंगे। यह कदम

  • "अगले 10 वर्षों में देश की साक्षरता दर में 20% सुधार की उम्मीद।
  • डिजिटल फ्रॉड्स के प्रति बचपन से ही जागरूकता बढ़ेगी।
  • परिवारों में निवेश और बचत पर बेहतर चर्चा होगी।
  • फिनटेक और बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक बड़ा जागरूक ग्राहक आधार तैयार होगा।"
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कक्षा के अनुसार पाठ्यक्रम क्या होगा?

कक्षा 6-8 (Middle School): पैसे की पहचान, जेब खर्च का प्रबंधन, बैंक में बचत खाता कैसे काम करता है।\nकक्षा 9-10 (High School): चक्रवृद्धि ब्याज (Compounding), टैक्स के बुनियादी सिद्धांत, इंश्योरेंस और डिजिटल भुगतान सुरक्षा।\nकक्षा 11-12 (Senior Secondary): स्टॉक मार्केट, म्यूचुअल फंड, क्रिप्टोकरेंसी के जोखिम और उद्यमिता (Entrepreneurship)।

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प्रैक्टिकल लर्निंग पर जोर

किताबों के अलावा, छात्रों को

शिक्षकों का प्रशिक्षण (Teacher Training)

शिक्षा मंत्रालय ने एनसीईआरटी (NCERT) और एनआईएसईपी (NISEP) के सहयोग से 5 लाख से अधिक शिक्षकों के लिए विशेष ओरिएंटेशन प्रोग्राम शुरू किया है। सेवानिवृत्त बैंक अधिकारियों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को भी अतिथि व्याख्यान (Guest Lectures) के लिए आमंत्रित किया जाएगा।

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माता-पिता की भूमिका

विशेषज्ञों का कहना है कि यह पाठ्यक्रम केवल बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि उनके माता-पिता के लिए भी सीखने का मौका होगा। जब बच्चे घर में सीखी हुई बातें चर्चा करेंगे, तो पूरे परिवार के वित्तीय व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आएगा।

Key Facts & Data

अनिवार्य कक्षाएं कक्षा 6 से 12 तक
मुख्य विषय बजटिंग, बैंकिंग, स्टॉक मार्केट और इंश्योरेंस
सत्र की शुरुआत जून 2026 (नया अकादमिक वर्ष)
मूल्यांकन तरीका प्रोजेक्ट-आधारित और प्रैक्टिकल असाइनमेंट
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Key Takeaways

  • "यदि आप माता-पिता हैं, तो अपने बच्चों को इस विषय में रुचि लेने के लिए प्रोत्साहित करें।
  • उनकी खुद की एक छोटी 'गुल्लक' या बैंक खाता खुलवाएं और उन्हें प्रबंधन करने दें।"